Saturday, 28 June 2014

प्रेमिका की कुंवारी बुर

प्रेषक : सैम्यूल जेम्स
यह मेरी सच्ची कहानी है। मैं एक स्मार्ट, सेक्सी और सुन्दर लड़का हूं। वैसे तो मैंने बीस बाईस लड़कियों के साथ सेक्स किया है पर यह मेरी प्रेमिका के साथ पहली चुदाई थी।
१९९९ की बात है। मैं अपनी मौसीजी को देखने पी.जी.आई. लखनऊ गया था। वहां पर मुझे मेरी प्रेमिका से मुलाकात हुई। उसकी शादी लखनऊ में मेरी मौसी के खानदान में हुई थी। मैं और मेरे मामा सुबह ही पी.जी.आई. पहुंच गए थे। मैंने जब नीतू को देखा तो मैं बहुत खुश हुआ। वो रात भर मौसी की देखभाल करने के लिए जागी थी।
थोड़ी देर बाद मौसी ने मुझसे कहा कि सैम तुम नीतू को कमरे में ले जाओ, वो रात भर की जागी हुई है, उसे फ़्रेश होना है, नहाना धोना है। मौसी का घर पी.जी.आई. से बीस किलोमीटर दूर है, इसलिए मौसाजी ने हस्पताल के कैम्पस में कमरा ले रखा था। मैं नीतू को लेकर कमरे में चला गया। रास्ते भर वो मुझसे मेरा हालचाल पूछती रही और कहती रही कि उसे मेरी बहुत याद आती है। मैंने कहा- तुमने तो शादी कर ली, मैंने भी शादी कर ली लेकिन मैं अकसर तुम्हारी याद में खोया रहता हूं। थोड़ी देर बाद हम कमरे में आ गए।
मैं तो बिस्तर पे जाकर सो गया, उसने कहा कि मैं नहा लेती हूं। वो रात भर की जागी हुई थी।बाथरूम में गई लेकिन भीतर से बंद करने के लिए चिटकनी नहीं थी। उसने सोचा कि और कोई तो आएगा नहीं ,वो अपने सारे कपड़े उतार के नहाने लगी क्योंकि उसे उन्हीं कपडों में घर भी जाना था, अचानक दरवाजा खुल गया। वो मेरे सामने नंगी खड़ी थी। मै बेड पे लेटा दरवाजे की तरफ़ ही देख रहा था। हम दोनों ने एक दूसरे को देखा। वो उसी हालत में दरवाजे को बंद करने लगी।
नहा के वो जब बाहर आई तो नजरे नहीं मिला पा रही थी। अचानक वो मेरे बगल में आ के बैठ गई, मुझसे कहने लगी …आइ लव यू सैम …आज मेरे साथ जो हुआ पहले कभी नहीं हुआ ..मैंने मौके की नजाकत को समझते हुए उसे अपनी बाँहों में भर लिया किस करने लगा। जीभ से जीभ टकराते ही मानो ऐसी हलचल होने लगी जैसे दो बिछडे प्रेमी आज मुद्दत के बाद मिले हों। हम दोनों ने एक दूसरे के सारे कपड़े वहीँ पे उतार फेंके। बदन की गर्मी शोलों जैसी लग रही थी। उसकी चूची जैसे कह रही थी आज सिर्फ़ मुझे चूसो, मैं कभी उसके होंठ चूसता तो कभी उसकी चूची।
मैंने जब उसके बुर में ऊँगली रखी तो उसमे से पानी निकल रहा था। उसने मेरे लंड पे हाथ जब रखा तो मेरा लंड फनफना उठा। मैंने लन्ड को उसके मुंह पे रखा तो उसे वो चूसने लगी और बोलती जा रही थी ..आई विल किल यू ,फक मी ..फक मी ..!!!!!!!!!!!
मैंने उससे पूछा क्या तुम्हारे साथ तुम्हारे पति ये सब नहीं करते हैं क्या …?
वो बोली- उनके पास टाइम नहीं है ! १०-०५ मिनट में ही सब कुछ करके सो जाते हैं …!!!
मैंने सोचा कि आज इसे जम के चोदूंगा ..मेरा लंड जब तन्नाने लगा तो मैंने उसकी बुर में ७ इंच का लंड डाला तो वो तड़प उठी। मैंने चार धक्के ही लगाये थे उसकी बुर से खून आने लगा।
मैंने पूछा कि इतना अंदर कभी नहीं गया क्या?
उसने कहा नहीं मेरे पति मुझसे सेक्स नहीं कर पाते हैं, उनका लंड छोटा है .तुमने तो कमाल कर दिया …!
उसके बाद १० मिनट तक चोदते चोदते मै भी झड़ गया। १५-२० मिनट बाद वो मेरा लंड अपने मुंह से फिर चूसने लगी। मेरा लंड इतना लंबा और मोटा हो गया कि मैंने २०-२२ मिनट तक उसे चोदा तब जाके झड़ा…उसे बहुत आनद मिला ..
नीतू की बुर में जो मजा मिला शायद ही कभी मिला हो …
मैं आज भी उसके सम्पर्क में हूँ … वो आज मेरे बच्चे की माँ भी है .वो आज लखनऊ में है और मैं उससे २०० किलोमीटर दूर।

भाभी किराएदार

प्रेषक : समीर रंजन
हेलो फ्रेंड्स, मैं समीर लखनऊ वाला फिर हाज़िर हूं दूसरी कहानी लेकर
यह बात आज से १ साल पुरानी है जब हमारे मकान में एक किरायदार रहने के लिए आए थे। में उन्हें भैया और भाभी कहता था। धीरे धीरे उनसे अच्छे सम्बंध बनते गये और मैं उनके करीब पहुंचता गया।
भाभी का पति तो ज़्यादातर तौर पर बाहर ही रहता था। एक दिन यूँ हुआ कि भाभी के पति गये हुए थे और मेरे घर वाले भी आउट ऑफ मुंबई गये थे और कमरे की चाबी भाभी को दे गये, मुझे घरवालो ने फोन कर के बता दिया था की चाबी भाभी के पास है।
मैं घर पे आया और सीधा भाभी के कमरे की बेल बजाई तो भाभी निकली उस वक़्त उन्होने क्रीम रंग का गहरे गले सूट पहन रखा था और सिर पे दुपट्टा भी नही था। वैसे भाभी का फिगर ३६ ३२ ३६ होगा, ब्रा इतनी टाइट पहन रखी थी कि मुमे बाहर आने के लिए फड़फड़ा रहे थे।
मैंने कहा- भाभी चाबी चाहिए !
तो भाभी ने कहा- अंदर आ जाओ ! मैं चाबी लाती हूं !
इत्तफ़ाक़ से क्या हुआ कि भाभी चाबी रख कर भूल गई. भाभी थोड़ी देर बाद आई और मुझसे कहा कि चाबी तो पता नही कहां रख कर भूल गई मैं?
मैने कहा- भाभी चाबी तो चाहिए नहीं तो मैं रात को कहां पर लेटूंगा?
तो भाभी ने कहा की ठीक है, मैं और अच्छी तरह से एक बार और देख लूँगी। यह कह कर वो सोफे पर बैठ गई और मुझसे बात करने लगी और फ़्रिज़ में से पेप्सी निकाल कर ले आई। मुझे भाभी ने पेप्सी दी लेकिन खुद नहीं ली।
इस पे मैने कहा- आप भी लो।
तो भाभी ने कहा की नहीं मैं नहीं लूँगी मेरे सर में दर्द हो रहा है सुबह से.
तो मैं भाभी के पास उठ कर गया और मैने कहा कि मैं आपका सर दबा देता हूं भाभी !
वो मना करने लगी कि नहीं तुम तक़लीफ़ मत करो मैं दवाई ले लूँगी तो मैने कहा- भाभी क्या मुझे इतना भी हक़ नही है कि मैं आपका सर दबा सकूं?
मेरे जोर देने पर भाभी मान गई. मैं सोफे पर चढ़ कर भाभी का सर इस अंदाज़ से दबा रहा था कि भाभी की रीड की हड्डी मेरे लंड से छू रही थी। मेरा लंड भाभी के स्पर्श से ही फ़नफना गया और ऊपर से भाभी के कमीज़ का गला गहरा था जिसके कारण उनकी चूची ऊपर से साफ़ दिखाई दे रही थी। मैं धीरे धीरे सर दबा रहा था। भाभी मदहोश सी होती जा रही थी। फिर क्या था मैने भाभी को अपनी आगोश में ले लिया और वहीं सोफे पर लेट गया तो भाभी ने एकदम से उठ कर कहा कि यह क्या कर रहे हो?
तो मैने भाभी से कहा कि भाभी आप मुझे बहुत अच्छी लगती हो, मैं आपसे बहुत बहुत प्यार करता हूं, तो भाभी ने इतरा कर कहा कि वाह जी वाह ! बड़ा आया प्यार करने वाला प्यार करने वाले इतनी देर नहीं लगाते हैं !
मैने जो देखा तो भाभी की सलवार नीचे खुली पड़ी थी। मुझे ग्रीन सिग्नल मिलते ही मैं लग गया अपने काम पर।
पहले तो मैने भाभी के होंठों को चूस चूस कर लाल कर दिया फिर उसके बाद मैने कहा भाभी से कि भाभी ! कभी लंड का भी स्वाद चखा है तुमने?
तो कहने लगी- छी ! मुझे तो घिन आती है!
मैने कहा- घिन किस बात की? अरे यह तो बाहर के देशों में खूब जम के होता है वो लोग तो पहले लंड ही चूसाते हैं और अगर बिना लंड चूसाए वो चोदेंगे तो उनका खड़ा ही नहीं होगा।
तो भाभी ने कहा- जैसे भी हो मैं नही चूसूंगी !
मैंने कहा- ठीक है आज नहीं तो कल पता चलेगा इसके ज़ायके का !
तो मैं खड़ा हुआ। लंड तो खड़ा ही था, मैने अपनी पैन्ट खोली, लंड निकाला, मेरा लंड तकरीबन 6 इंच लंबा है और 2.5 इंच मोटा है भाभी मेरा लंड देख कर चेहरे पर थोड़ी सी मुस्कुराहट ला कर बोली तुम्हारा लंड तो बहुत तगड़ा है !
मैने कहा- अरे खाते पीते घर का है ऐसे वैसे थोड़ी ना है !
मैं भाभी के पास जा कर खड़ा हो गया और भाभी भी खड़ी थी। मैने खड़े ही खड़े भाभी की चूत पर हाथ फेरा और भाभी इतनी उतावली थी कि उसने आव देखा ना ताव, फटाफट लंड को अपनी चूत में डालने के लिए कहने लगी।
मैं खड़े खड़े ही उसकी चूत में लंड डालने की कोशिश कर रहा था मगर मेरी कोशिश नाकाम हो गई। वहीं एक कुर्सी रखी थी। मैं कुर्सी पर बैठ गया। मैने कहा भाभी से कि अब आओ मेरे ऊपर, तो भाभी एकदम मेरे पास आ कर मेरे लंड पर बैठ गई और अपनी गांड हिलाने लगी।
थोड़ी देर बाद मेरे झड़ने का टाइम आया तो मुझे याद आया कि भाभी ने कहा था कि अन्दर मत झड़ना दिक्कत हो जाएगी मैने झट से अपना लंड चूत में से निकाला और दीवार पर पिचकारी छोड़ दी।
उस दिन भाभी और मैंने जम कर ५ बार चुदाई की। यह सिलसिला ४ महीने तक चलता रहा।
जब भी मुझे और भाभी को मौका मिलता हम लोग जम के चुदाई करते थे। मगर २ महीने पहले भाभी ने अपना घर बदल लिया क्योंकि उनके पति को गाड़ी पार्क करने की दिक्कत थी। उन्होने ऐसी जगह घर ले लिया जहा पार्किंग का हिसाब ठीक था।
अब १५ २० दिन मे एक-आध बार चुदाई का मौका मिलता है तो हम लोग काम कर लेते है नहीं तो वो अपने घर में अपने घर !
मेरी अपनी राय यह है औरतो के बारे में कि औरत के कभी भी साथ सेक्स करो तो उन्हें पूरी तरह नंगा मत करो क्योंकि नंगी औरत कभी भी अच्छी नहीं लगती एक परदा होना चाहिए जो सेक्स को बढ़ाए !
जैसे मैने जब भी भाभी की चूत मारी मैंने कभी भी उनके पूरे कपड़े नहीं उतारे कभी उनको ब्रा में चोदा कभी सूट पहने ही पहने सूट को उपर करके उनके चूचियों को चूसा। कभी साड़ी का पेटीकोट उपर करके चूत मारी।
सबसे ज़्यादा मज़ा आता है साड़ी में चूत मारने का ! साड़ी को उतारो, पेटीकोट के नीचे से पेंटी को उतारो, पेटीकोट को ऊपर चढ़ा कर खड़े खड़े चूत मारो, गोदी में उठा कर चूत मारो, कितना आनंद आएगा !

मैंने लण्ड चूसा

प्रेषिका : गुंजन शर्मा
मेरा नाम गुंजन है और मेरी उम्र २७ साल है. मेरी शादी को दो साल हो गए हैं.
यह तब की बात है जब मैं शादी के बाद पहली बार अपनी माँ के घर गई थी. मैं अपनी सहेली सुमन से मिलने उसके घर गई तो वह बहुत खुश हुई.
हम दोनों बातें करने लगे. बातों बातों में उसने मुझसे पूछा कि दर्द हुआ था. मैं तो शरमा गई. मैंने नही सोचा था कि वो ऐसे पूछेगी. सुमन बोली कि शरमाओ नहीं ! बताओ ना !
मैं झिझक कर बोली- हाँ दर्द तो बहुत हुआ और खून भी निकला.
सुमन यह सुनकर उतेजित हो गई. कहने लगी कि क्या खून भी निकला?
मैंने हलके से सर हिला दिया. यह सुनकर सुमन बोली कि क्या तुमने पहली बार किया था?
मैंने कहा – हाँ.
ओहो तो तुम इतनी भोली हो. फ़िर सुमन कहें लगी अच्छा बताओ क्या क्या किया.
मैंने कहा- क्या मतलब?
अब इतनी भी भोली मत बनो. मुंह में डाला क्या?
मैं तो शरमा गयी. सच तो यह है कि मेरे पति ने मुंह में डालने के लिए कहा था, पर मैं डाल नही पाई. मैंने सुमन को सच बता दिया.
वह बोली- अरे तुमने अपने पति को यह मजा नहीं दिया?
मैंने सुमन से कहा की ऐसा कोई कैसे कर सकता है?
वह बोली- बहुत मजा आता है, तुम जरूर करना.
मैंने हिम्मत जुटा कर सुमन से पूछा कि क्या तुम करती हो.
उसने कहा- हाँ वह तो रोज करती है. लंड चूसे बगैर तो मजा ही नहीं आता.
हम बातें कर ही रहे थे कि सुमन के पति राजेश आ गए. सुमन को तो पता नहीं क्या हो गया, वो राजेश से बोली कि देखो इसकी शादी को दस दिन हो गए हैं और ये अभी तक लण्ड चूसना नहीं सीखी. मानती ही नहीं कि कोई ऐसे भी करता है. यह कहकर सुमन उठी और राजेश से बोली कि आओ इसे कुछ सिखा दें !
और उसने राजेश की जिप खोलकर उसका लंड बाहर निकाल लिया. इससे पहले कि मैं कुछ समझ पाती, सुमन ने लंड मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. मैं तो देखकर हैरान रह गई. राजेश का लंड बहुत मोटा और लंबा हो गया था. सुमन उसे चूसने में व्यस्त थी. राजेश मेरी और देख रहा था और मैं भी उतेजित हो रही थी. मैंने पहली बार यह सब देखा था.
थोडी देर बाद सुमन बोली- देख कर मजा आ रहा है क्या?
मैंने कहा- हाँ !
सुमन ने बिना कुछ बोले मेरी सारी ऊपर उठा दी. उसका हाथ मेरी चूत पर पहुँच गया. मैंने पैंटी नहीं पहनी थी. सुमन की उँगलियों के स्पर्श ने मुझे और उतेजित कर दिया. मैं भूल गई कि राजेश भी वहीं खड़ा है. मेरी साड़ी मेरी जांघों तक उठ गई और मैंने अपनी टाँगे फैला ली. मेरी चूत पर बाल न देख कर राजेश उतेजित होने लगा.
सुमन बोली- अरे ! वह तुम्हारी चूत तो चिकनी है !
मुझे अब सिर्फ़ मजा आ रहा था और बिल्कुल होश नहीं था. कुछ ही देर में हम तीनो नंगे थे और राजेश सुमन को छेड़ रहा था और पता है मैं क्या कर रही थी?
मैं राजेश का लण्ड चूस रही थी !

पहला यौन-सम्बंध निशु संग

प्रेषक : प्रकाश रंजन
हेलो दोस्तो !
मैं अपने दोस्त नवीन के यहां घूमने गया था। उसके परिवार में वो, उसकी बहन निशु और मम्मी डैडी हैं। मेरा पहला यौन-सम्बंध निशु संग हुआ था।
रात के करीब नौ बजे खाना खाने के बाद नवीन, निशु और मैं रज़ाई औढ़े अंताक्षरी खेल रहे थे। मेरी बगल में नवीन और सामने निशु बैठी थी। आध घण्टे से मेरे पैर मुड़े होने के कारण दर्द करने लगे थे तो मैंने अपने पैर सीधे कर लिए। मुझे महसूस हुआ कि मेरा पैर किसी मुलायम चीज़ से छू रहा है।मैंने अपने पैर के अंगूठे को धीरे धीरे हिलाया तो समझ गया कि वो मुलायम चीज़ निशु की चूत है, परन्तु निशु मुझे कुछ कह नहीं रही थी, चुपचाप अन्ताक्षरी खेल रही थी। एक घण्टे बाद हम तीनों एक साथ सो गए। बीच में नवीन सोया था। मेरी आंखों से नींद गायब थी। मैं कैसे भी निशु को चोदना चाहता था।
रात के करीब दो बजे निशु बिस्तर से उठ कर बाथरूम जा रही थी, मैं भी उठा, उसके पीछे पीछे बाथरूम में घुस गया और उसे पीछे से अपनी बाहों में ले लिया। पहले तो वो घबराई, ऐसे दिखाने लगी कि रात वाली घटना से अन्जान हो, लेकिन मैं पूरे जोश में था, जैसे ही उसकी चूत पर हाथ रखा, वो चिहुंक गई और अपनी आंखें बंद कर ली,”प्लीज़ रंजन भैया मत करो ! मुझे कुछ होता है !”
“क्या होता है?”
“पता नहीं लेकिन बहुत अच्छा लगता है !”
“अब और मज़ा आएगा मेरी प्यारी निशु ! साथ दोगी?”
“हां ! लेकिन मैं गर्भवती तो नहीं हो जाऊंगी?”
“नहीं”
मैंने उसकी चूची पर हाथ रखा ओर आहिस्ते से सहलाने लगा। मैं उसके कमसिन होठों का रस पीने लगा,”कैसा लग रहा है?”
“शऽऽऽ मत पूछिए बस करते रहिए आहऽऽऽ”
मैंने उसकी कमीज़ को ऊपर से खोल दिया, अन्दर उसने गंजी पहनी थी। गंजी के ऊपर से मैं निशु की चूची मसलने लगा।
निशु भी अपना हाथ मेरे लण्ड के ऊपर रख कर लण्ड को मसलने लगी। थोड़ी देर बाद उसने मेरा पायज़ामा खोल दिया। मेरे लण्ड को अन्डरवीयर से निकाल कर अपने हाथ से मुठ मारने लगी। मैं भी ताव में आ गया और उसकी गंजी उतार कर उसकी चूचियों को आज़ाद कर दिया और मुंह में ले कर चूसने लगा।
“हायऽऽऽऽ जरा जोर से दबाईए ना ! बहुत मज़ा आ रहा है !”
“तुमने पहले किसी से ………”
“नहीं भाई, लेकिन ब्लू फ़िल्म देखती हूं !”
“अच्छा! “
“क्या आप मेरी बुर को चूसना पसन्द करेंगे?”
“क्यों नहीं.. लेकिन पहले तुम मेरे लण्ड को चूस लो … उसके बाद …..”
निशु नीचे झुकी और मेरे लण्ड को अपने मुंह में ले कर चूसने लगी। मैंने उसकी सलवार उतार कर उसे पूरी तरह नंगा कर दिया। मेरे शरीर पर भी कोई कपड़ा नहीं था, हम दोनों बिल्कुल नंगे थे।
“क्या हम एक दूसरे का बुर और लण्ड चूसें?”v
“हां बिल्कुल !”
वो जमीन पर लेट गई, मैंने अपना लण्ड उसके मुंह में डाल दिया और अपना चेहरा उसकी बुर पे ले गया। निशु की बुर की खुशबू मुझे पागल कर रही थी। मैं अपनी जीभ से उसकी बुर का रस पीने लगा।
“अब प्लीज़ मुझे चोदिए !”
मैं खड़ा हो गया, उसने लेटे हुए अपने पांव ऊपर किए। मैंने अपना लण्ड जैसे ही उसकी बुर पर रखा, निशु की बुर भट्टी की तरह जल रही थी। उसके चूसने से मेरा लण्ड गीला था। मैंने जोर से लण्ड को उसकी बुर में डाला,”प्लीज़ निकाल लो ! बहुत दर्द हो रहा है”
मैंने देखा मेरे लण्ड का आधा सुपारा उसकी बुर में है और बुर से खून निकल रहा है। मैं उसके होंठ चूसने लगा ओर जोर जोर से चूचियों को मसलने लगा, धीरे से लण्ड को भी अन्दर करता रहा।
थोड़ी देर में निशु कमर हिलाने लगी। मैं भी अब पूरे जोर से उसकी बुर को चोदने लगा.”आ आ अई आहऽऽऽ और तेज़ऽऽ…”
“उफ़्फ़”v
“आआह्हऽऽ”
“मेरा गिरने वाला हैऽऽऽ प्लीज़ और तेज़ऽऽ !”
निशु मुझसे चिपकने लगी। इस तरह हम दोनों एक साथ झड़ गए और काफ़ी देर तक एक दूसरे के साथ चिपके रहे। उसके बाद हम बिस्तर पर आकर सो गए।

मेरी ऑफिस मेट

प्रेषक : नीरज गुप्ता
अन्तर्वासना के सभी पाठको का एक बार फ़िर से शुक्रिया, आपके मेल्स मुझे मिले और उनसे मुझको और लिखने का प्रोत्साहन मिला. बस एक ही दुःख है कि ज्यादातर फीमेल्स ने मुझको जो मेल्स भेजी वो इस तरह थी – मैं आपके शहर आ रही हूँ, अपन सेक्स करेंगे फ़िर मैं वापस अपने शहर चली जाउंगी. हम आपस में कोई लगाव नही रखेंगे. सिर्फ़ सेक्स ही अपना सम्बन्ध होगा.
इन मेल्स को पढ़ कर दुःख हुआ. लेंकिन मुझे इस बीच मुझे दो अच्छी सहेलियां मिल गई जो दोनों भी आपस में अच्छी सहेलियां हैं.
प्यार यदि हो तो सेक्स उसको बहुत ऊंचाई पर ले जाता है न कि सेक्स के कारण प्यार कम होता है. जिस का प्यार सेक्स करने से कम हो उसको वास्तव में प्यार होता ही नही है. वो सिर्फ़ सेक्स का ही भूखा है.
अब मैं एक और कहानी आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ. कृपया अपने विचार लिखते रहें. मैं किस तरह का आदमी हूँ ये मेरी कहानी ” डॉक्टर मेरी गुरुआनी” पढने के बाद जान चुके होंगे.
डॉक्टर से मिलना कम हो गया था, डॉक्टर साब का ट्रान्सफर अलका के साथ ही हो गया, डॉक्टर साहब और अलका साथ रहने लगे थे और अब खुश भी थे. हम भी खुश हैं, हमारी दोस्ती बिगड़ी नही लेकिन अब मेरी भी शादी हो चुकी थी और हमारी दोस्ती में सेक्स का वो मतलब भी वैसे ही पूरा हो रहा था. फ़िर भी हम खुश हैं क्यूंकि हम बेवफा नही हैं.
कुछ साल निकल गए. धीरे धीरे मेरी पत्नी का सेक्स के प्रति लगाव थोड़ा कम हो गया और आश्चर्य कि वो पहले नही शरमाती थी अब कई बातों में शरमाने लगी या यूँ कह लें कि हिचकने लगी. मेरे सेक्स की चाहत अधूरी हो गई.
ये बहुत पुरानी बात नही है।
मेरा परिचय मेरे खास दोस्त के ऑफिस में इंटरव्यू देने आई एक लड़की से हुआ. मैं ही इंटरव्यू ले रहा था. वो लड़की नमस्ते कर के सामने कुर्सी पर बैठ गई. साधारण शक्ल सूरत की लड़की ५ फुट ६ इंच कद की थी. लेकिन उसका बदन बहुत आकर्षक है. एकदम सुता हुआ. उसने मुझे बहुत इम्प्रेस किया. मैंने उसको जाने के लिए बोला और कहा कि आपके फ़ोन पर कॉल करके आपको बुला लिया जाएगा.
मैंने अपने दोस्त को उस लड़की रीना को बुलाने को कह कर आगे के सारे इंटरव्यू कैंसल कर दिए और अपने ऑफिस में चला आया. मेरे दोस्त ने उस लड़की रीना को कॉल करके बधाई दी और ऑफिस जोइन करने के लिए कह दिया. जाने रीना ने मुझमे क्या देखा कि हम दोनों में धीरे धीरे बातचीत शुरू हुई फोन पर और फ़िर वो अपने ऑफिस के बाद मेरे ऑफिस में आने लगी. हम दोनों साथ में ही खाना खाते, नाश्ता करते और शाम को ७ बजे बाद मैं उसको उसके घर के बाहर मेन रोड पर छोड़ भी आता. फ़िर तो हम एक दूसरे से खुलते गए. मैं लगभग रोज ही उसको घर तक छोड़ने लगा. आश्चर्य की बात थी कि आज के जमाने में कोई ऐसी भी लड़की थी जिसको सेक्स की कोई जानकारी नही थी.
मेरी उस से कोई ग़लत फायदा उठाने की नीयत नही थी. डॉक्टर की तरह ही उस से भी अच्छी दोस्ती रखना चाहता था. इसलिए मैंने उसको सेक्स की जानकारी देना शुरू किया. हम और एक दूसरे के करीब आते गए इसके बावजूद कि वो जानती थी कि मैं शादी शुदा हूँ हम एक दूसरे को चाहने लगे. हम ने एक दूसरे को वादा किया कि हम एक दूसरे के साथ तब तक बंधे रहेंगे जब तक कि हमारे कोई और रिश्ते इस कारण ही बिगड़ने न लगें. हम एक दूसरे से चिपक कर बैठने लगे. उसको सेक्स चढ़ने लगा. शाम को मेरे ऑफिस में हम दोनों को छोड़ कर कोई नही होता था.
एक दिन एकांत पाकर मैंने ऑफिस में ही उसको होटों पर किस किया. हम दोनों को ही बहुत अच्छा लगा. फ़िर मैंने उसके बोबों पर हाथ रखा तो उसने कसकर मेरे हाथों को पकड़ लिया. उसकी हालत ख़राब होने लगी. थोडी देर रुक कर जब रीना थोड़ा सामान्य हुई तो मैं उसको उसके घर छोड़ आया.
फ़िर एक दिन हम कुछ ज्यादा ही फ्री हुए तो मैंने ऑफिस के दरवाजे में चाभी लगा कर बंद किया और वापस कुर्सी पर आकर उसका पायजामा नाड़ा खोल कर थोड़ा नीचे कर दिया और उसकी जांघें सहलाने लगा. रीना को सेक्स चढ़ने लगा. उसकी आँखें मुंदने लगी. मैंने पैंटी में हाथ डालना चाहा तो रीना ने मेरा हाथ पकड़ लिया बोली प्लीज नही. तो मैंने उसकी पैंटी की साइड से ऊँगली उसकी चूत पर छुआई. वो तो जैसे पागल हो गई. उसका सर मेरे सीने से लग गया. मेरा एक हाथ उसकी गर्दन पर लिपट गया और दूसरे हाथ से उसकी चूत साइड से सहलाता रहा. वो सेक्स में पिघलने लगी. फ़िर मैंने अपना हाथ उसकी पैंटी में दे दिया. वो थोड़ा कसमसाई लेकिन मैंने हाथ नही हटाया. वो लम्बी साँसे लेने लगी. मैंने उसकी चूत सहलाना शुरू किया. और साथ में लिप किस भी शुरू कर दिया. मेरी इच्छा थी उस से आज ही सेक्स करने की. मैंने उसकी चूत में ऊँगली की. मुझे एक झटका सा लगा. वो अभी तक अनछुई थी. मैंने सोच लिया कि कोई बात नही, इस लड़की को लंड अंदर डाल कर नही करूँगा.
मैं खडा हो गया. और उसको भी कुर्सी से खडा कर लिया और हम एक दूसरे से होंट मिलाते हुए एक दूसरे की बाँहों में बंध गए. मैंने भी अपने पैंट और अंडरवीयर उतार कर लंड उसको खेलने को दे दिया. उसने लंड अपने हाथों में पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया. मैंने उसके बोबे दबाने शुरू कर दिए.
फ़िर थोडी देर में उसका कुरता ऊँचा करके मैंने उसके बोबे ब्रा से बाहर कर लिए और उनको चूसना शुरू कर दिया वो जल उठी. उसने कस कर मुझको बाँहों में ले लिया. मैंने उसकी हिप्स को टेबल टॉप के साथ लगाया और अपने लंड को उसकी चूत की दरार में लगा दिया और जोर से दबा कर धीरे धीरे चूतड़ चला कर उसके कलाईटोरिस को लंड से रगड़ देने लगा. हम एक दूसरे के होंट और जीभ को खूब चूसने लगे. रीना को भी मजा आने लगा. वो भी अपनी गांड चलाने लगी. अब मैंने अपना बायाँ हाथ उसके चूतड़ों के पीछे करके अपनी और भींच रखा था और दायें हाथ से उसके बोबे दबा रहा था. मुँह से मुह मिले हुए थे. उसके हाथ मेरी गर्दन पर लिपटे हुए थे. धीरे धीरे हमारी मंजिल करीब आती गई फ़िर वो और उसके बाद हम दोनों ही झड़ गए. कुर्सी पर बैठ कर एक दूसरे को बाँहों में ले कर सहलाने लगे. फ़िर थोडी देर बाद कपड़े पहन कर सामान्य हो गए.
आज कई महीने हो गए. हम एक दूसरे के साथ सुखी और संतुष्ट है. वो सेक्स जान चुकी है लेकिन अब भी हम इसी तरीके से करते हैं.

मधु के साथ तीन दिन

प्रेषिका : स्तुति शर्मा
मेरा नाम अरुण है। मेरे दफ़्तर में एक मधु नाम की लड़की थी। वो सच में बला की खूबसूरत थी। जब से वो मेरे दफ़्तर में काम करने के लिए आई, मैं तो बस उसको ही देखता रहता था। उसकी फ़ीगर कमाल की थी और लम्बे लम्बे बाल थे। उसके बड़े बड़े बूब्स देख कर तो मैं पागल ही हो जाता था और हर वक्त सोचता रहता था कि कब मैं इन बूब्स को चूस पाऊंगा। मैं अपने केबिन से छिप छिप कर उसको देखता रहता और उसके साथ सेक्स करने के सपने देखता रहता था। उसने भी मेरी यह बात पकड़ ली थी मैं उसको देखता रहता हूँ लेकिन उसने कभी कुछ नहीं कहा। शायद वो भी मेरी तरफ़ आकर्षित थी।
लेकिन एक दिन ऐसा हुआ कि मेरे सारे सपने सच हो गए।
हुआ यूं कि एक दिन मधु मेरे केबिन में आई और उसने मुझे कहा कि उसे वेतन के अलावा कुछ और पैसों की जरूरत है और वो ये पैसे धीरे धीरे वापिस कर देगी। लेकिन मैं उसके साथ सेक्स करना चाहता था इसलिए मैंने उसे कहा कि अगर वो मुझ पर विश्वास करती है तो मैं उससे अकेले में मिलना चाह्ता हूं।
वो मान गई। मैंने उसे घर आने को कहा और कहा कि पैसे मैं घर पर ही दे दूंगा। अगले तीन दिन के लिए दफ़्तर बंद था और मेरे घर वाले भी बाहर गए हुए थे इसलिए मैंने उसे अगले दिन सुबह घर पर बुला लिया।
अगले दिन जब वो घर आई तो उसने जीन्स और शर्ट पहनी हुई थी और बाल खुले हुए थे। उस वक्त वो कयामत लग रही थी। उसे देख कर मेरा लण्ड एक दम से खड़ा हो गया। मैंने बड़ी मुश्किल से अपने आप को सम्भाला और उसे अपने बेडरूम में ले गया। मैं बस तरीका सोच रहा था कि किस तरह से मैं उसको चोदूं ! तब मैंने उसको अपने पास बुलाया और उसके हाथ अपने हाथों में ले कर कहा,” मधु, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ.”
उसने यह सुन कर कहा कि वो मुझ से प्यार करती है. यह सुन कर मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं रहा और मैंने उसे अपनी बाँहों में जकड लिया। उसके बूब्स मेरी छाती से छू रहे थे और मैं और ज़्यादा पागल हो रहा था मैंने उसे अपनी गोद में बिठा लिया और उसके चेहरे को अपने हाथों से सहलाने लगा. अब मैं उसको अपने और करीब ले कर आया और अपने होंठो को उसके होंठों पर रख कर चूमने लगा। मैं बड़े प्यार से उसके होंठों को चूम रहा था और वो भी इसका मजा ले रही थी।
काफ़ी देर तक चूमने के बाद मैं उसके पूरे चेहरे पर चूमने लगा उसके गालों पर, उसकी गर्दन पर। फिर मैंने उसकी शर्ट का पहला बटन खोला वो एक दम से बोली यह क्या कर रहे हो, मैंने कहा हम एक दूसरे से प्यार करते हैं इसलिए इसमें कोई बुराई नहीं है, यह बोलते बोलते मैंने उसकी शर्ट के तीन चार बटन खोल दिए। अब मुझे उसकी ब्रा नज़र आ रही थी और ब्रा में बंद उसके बड़े बड़े बूब्स बाहर निकलने को तड़प रहे थे।
मैंने उसकी शर्ट उतार दी और वो ब्रा में तो कयामत लग रही थी। तब उसका ध्यान मेरे लंड पर गया जो बहुत खड़ा हो चुका था और उसे बार बार चुभ भी रहा था।
मैंने कहा- इसे देखना चाहोगी?
तब उसने मेरी पैंट का बटन खोल कर मेरी पैंट और मेरा अंडरवियर भी उतार दिया और मेरे लंड को ले कर जोर जोर से मसलने लगी। तब वो मेरा लंड अपने मुंह में ले कर उसे चूसने लगी। उसके चूसने से मेरा लंड और भी बड़ा हो गया। उसे मेरे लंड को चूसने में और उसके साथ खेलने में बड़ा मज़ा आ रहा था लेकिन मुझ से कंट्रोल नहीं हो रहा था इसलिए मैंने उसे उठा कर उसकी पैंट भी उतार दी। उसने पिंक कलर की पैंटी पहनी हुई थी। वोह सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में मेरे सामने खड़ी थी, मैं अपने पर कंट्रोल नहीं कर पा रहा था और मैं उसको पागलों की तरह चूमने लगा।
मैंने उसको उल्टा किया और अपने मुंह से उसकी ब्रा के हुक खोल दिए। अब वो भी तड़प रही थी चुदवाने के लिए। उसके बूब्स को देख कर मेरा लंड ज़ोर ज़ोर से झटके खाने लगा तब सबसे पहले मैंने उसके निप्पल को चूपा। उसके निप्पल भी बड़े सखत हो रखे थे और मुझे भी उन्हें चूपने का बड़ा मज़ा आ रहा था।
वो भी बहुत तड़प रही थी और बार बार बोल रही थी- और ज़ोर से, और ज़ोर से.
फिर मैं उसके बूब्स को दोनों हाथों से ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा और वो चीखने लगी फिर मैंने उसकी पैंटी को अपने दांतों से खींच कर उतार दिया। मेरे इस तरह करने से वो और ज़्यादा तड़पने लगी। तब मैंने उसकी चूत को देखा, उसकी चूत पर बाल नहीं थे और उसकी चूत बहुत मस्त लग रही थी। उसकी चूत को देख कर मेरे मुंह में पानी आ गया और मैं उसकी चूत को चाटने लगा। मधु ज़ोर ज़ोर से चीखने लगी आ आ आ आ ओ ऊ ऊ ओ ओ करने लगी
थोडी देर तक उसकी चूत चाटने के बाद मैंने देखा की वो बहुत गरम हो चुकी थी लेकिन मैं उसको और गरम करना चाहता था इसलिए अब मैं अपने लंड को उसके पूरे बदन पर घुमाने लगा, पहले उसके चेहरे पर अपने लंड को लगाया फिर उसकी गर्दन पर, फिर उसके बूब्स पर, उसके निप्पल पर, उसके बूब्स के बीच में अच्छी तरह मैं अपने लंड को लगा रहा था। मेरे लंड से जो पानी निकल रहा था वो भी उसके पूरे बदन पर लग रहा था जिससे वो और ज़्यादा गरम हो रही थी। मैंने अपने लंड को उसके बूब्स के बीच में अच्छी तरह दबा दिया वो भी मेरे लंड को अपने बूब्स में रख कर ज़ोर ज़ोर से दबाने लगी।
तब उसने मुझसे कहा- अरुण, अब और सहा नहीं जा रहा इस लंड को मेरी चूत में डाल कर मेरी प्यास शांत कर दो।
मैं नीचे लेट गया और मधु मेरे ऊपर बैठ गई उसने मेरा लंड पकड़ा और पहले अपनी चूत पर घिसने लगी फिर मैंने एक झटके से अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया मेरे लंड डालते ही मधु ज़ोर से चीखी। मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर था और मधु ज़ोर ज़ोर से हिलने लगी। वो ज़ोर ज़ोर से हिल रही थी और मैं कभी उसके बूब्स को दबा रहा था और कभी उसके निप्पल को चूप रहा था। थोड़ा देर बाद हम दोनों झड़ चुके थे।
फिर थोडी देर बाद हम दोनों बाथरूम में गए और इक्कठे नहाते वक्त एक बार फिर सेक्स किया। वो तीन दिन मधु मेरे साथ ही रही और हमने उन तीन दिनों में कई बार सेक्स किया, कभी बाथरूम में, कभी किचन में, कभी सीढियों में, कभी डाइनिंग टेबल पर और कभी ज़मीन पर। वो तीन दिन मेरी जिंदगी के सबसे खूबसूरत दिन थे।

ऋतू की इच्छा

प्रेषक : सचिन कुमार
हेल्लो मेरा नाम राहुल है और उम्र २४ साल है। मैं करनाल (हरियाणा) मैं रहता हूँ। मैं हमेशा अन्तर्वासना पर कथाएँ पढ़ता हूँ और मज़े करता हूँ।
आज मैं आपको मेरी सच्ची कहानी सुनाता हूँ।
वैसे मैं देखने में कोई खास नहीं हूँ, कद भी कम है पर मैं बातों से हमेशा ही सबको अपना बना लेता हूँ।
यह बात तबकी है जब मैं कंप्यूटर सीखता था, वहां पर एक लड़की आती थी २५-२६ साल की, उसका नाम ऋतू था, उसकी शादी हो चुकी थी। उसका फिगर कमाल का था, बड़े बड़े बूब्स और उसकी गांड तो बहुत ही सेक्सी लगती थी, थी भी वो काफी अमीर घर से, धीरे धीरे मैंने उस से बातें करना शुरू कर दिया।
उसने मुझे बताया कि वो यहाँ सिर्फ़ अपना समय काटने आती है, घर में उसका मन नहीं लगता। उसके पति हमेशा काम में व्यस्त रहते थे जयादातर वो शहर से बाहर ही रहते थे।
एक दिन उसने कहा कि चलो कहीं काफ़ी पीते हैं तो मैंने कहा कि आज तो मैं आपके हाथ की काफ़ी पीना चाहता हूँ।
तो उसने कहा ठीक है फ़िर मेरे घर ही चलते हैं मेरे पति भी बाहर गए हैं। फ़िर हम दोनों उसकी कार में उस के घर चले गए, उनके नौकर ने दरवाजा खोला, हम दोनों अन्दर चले गए तो उसने अपने नौकर को जाने के लिए कह दिया फ़िर अपने नौकर के जाते ही उसने अपने घर का दरवाज़ा बंद कर दिया।
उसके बाद वो कहने लगी कि तुमने काफ़ी पीनी थी, मैं बना के लाती हूँ। फ़िर थोड़ी ही देर में वो २ काफ़ी बना के ले आई। हम दोनों काफ़ी पीने लगे और इधर उधर की बातें करने लगे।
मैंने उससे ऐसे ही पूछ लिया कि आपके पति आपको भी समय देते हैं या फ़िर सिर्फ़ बिज़नस को ही?
तो वो उदास हो गई और कहने लगी कि उनके पास समय होता ही नहीं उसके लिए ! वो तो सिर्फ़ और सिर्फ़ बिज़नस को ही समय देते हैं !
फ़िर अचानक मेरे मुंह से निकल गया कि फ़िर तो आप दोनों…! इतना कहते ही मैं रुक गया।
तो वो कहने लगी- आप दोनों क्या? बोलो !
मैंने कहा कुछ नहीं !
वो बोली कि तुम यही कहना चाहते हो ना कि हम सेक्स करते हैं या नहीं !
मैंने कहा हाँ मैं यही पूछना चाहता था।
तो वो कहने लगी कि महीने में १ या २ बार सिर्फ़ ! कहने लगी पर मेरी इतनी इच्छा होती है कि बस पूछो मत !
यह कह कर वो चुप हो गई।
फ़िर वो बोली कि तुम्हे एक बात कहूँ तो तुम बुरा तो नहीं मानोगे?
ना ! मैंने कहा- नहीं बोलो !
वो कहने लगी कि अगर तुम मेरी इच्छा को पूरा कर दो मैं तुम्हें तुम जितना चाहोगे उतना पैसा दूंगी।
मैंने कहा कि यह तुम क्या कह रही हो? तो वो मेरे साथ आ कर बैठ गई उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, कहने लगी- प्लीज़ राहुल मैं प्यार चाहती हूँ प्लीज़ ! उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे अपने बेडरूम में ले गई वहां जाते ही हम दोनों ने किस करनी शुरू कर दी। फ़िर मैंने उसका कमीज़ निकाल दिया।
उसके बूब्स चाँदी की तरह चमक रहे थे, उसने श्वेत ब्रा डाली हुई थी, फ़िर मैंने वो भी निकाल दी और उसे बेड पर लेटा दिया और उसके एक एक अंग को चूमने लगा- उसकी आंखों को, होठों पर, उसके कानों पर, गले पर।
ऋतू के मुंह से सिसकी निकल रही थी सी इ इ ई इ ई ईई अह ह हह हह !
उसके बाद मैंने उसकी सलवार उतार दी और उसकी टांगों पर हाथ फेरने लगा। फ़िर मैंने उसकी टांगों पर ऊपर से नीचे तक किस किया और उसकी पैंटी पर हाथ फेरने लगा। ऋतू के मुंह से आवाजें आ रही थी अह ह ह ! उसकी पैंटी बिल्कुल गीली हो चुकी थी।
फ़िर मैंने उसकी पैंटी भी उतार दी और उसकी चूत को किस करने लगा। वो एक दम मछली कि तरह छटपटा रही थी।
फ़िर मैंने भी अपनी पैंट उतार दी और मैंने उसको अपने ऊपर ६९ पोसिशन में ले लिया फ़िर वो मेरा लंड लोलीपोप की तरह चूसने लगी।
फ़िर उसने कहा कि राहुल अब रहा नहीं जाता !प्लीज़ डाल दो !
तो मैंने उसको सीधा लेटाया और अपना लंड उसकी चूत के मुंह पर रख कर धक्का मारा, उसकी चूत काफी टाइट थी। उसको दर्द भी हो रहा था पर फ़िर मैंने एक जोर का धक्का मारा और मेरा लंड पूरा उसकी चूत में चला गया।
उसके बाद वो भी चूतड उछाल उछाल के मेरा साथ दे रही थी। ५ मिनट के बाद वो झड़ गई फ़िर मैंने भी अपनी गति तेज कर दी और १०-१५ झटके मारने के बाद मैं भी झड़ गया।
उसके बाद हम बहुत देर तक एक दूसरे के ऊपर लेटे रहे।
उसके बाद मैंने उसकी गांड भी कोल्ड क्रीम लगा के मारी।
शाम के ७ बज चुके थे मैंने उसको कहा कि मै चलता हूँ, तो उसने मुझे २००० रूपये दिए और कहा कि अगर तुम मेरी सहेलियों की भी इच्छा पूरी कर दो तो तुम्हें और भी पैसे मिल सकते हैं, बस अंधे को क्या चाहिए २ आँखें ! बस तब से मैं ऐसे ही इच्छा पूरी करने में लगा हूँ।